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अमित जानी: विवादों से है गहरा नाता, कई आपाराधिक मामलों में है आरोपी; सीमा हैदर को फिल्म ‘ए टेलर मर्डर स्टोरी’ में दे रहे मौका

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अमित जानी नवम्बर, 2019 में बसपा सुप्रीमो मायावती की मूर्ती तोड़ कर चर्चा में आए।  अमित जानी ने आरोप लगाया कि अखिलेश और मुलायम सिंह यादव के कहने पर मूर्ति तोड़ी थी। इसी साल (2019 में) शिवपाल यादव ने अमित जानी को बड़ी जिम्मेवारी सौंपी।

जहां उन्हें प्रगतिशील समाजवादी पार्टी युवजन सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया। शिवपाल के करीबी माने जाने वाले लम्बे वक्त तक उनके नेतृत्व में सपा से जुड़े रहे। अक्सर विवादित बयानों के चलते सुर्ख़ियों में रहने वाले अमित जानी ने सपा से बाहर होकर नवनिर्माण सेना पार्टी का गठन किया। 2019 में लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके, जहां उन्हें मुंह की खानी पड़ी।

विवादों से है गहरा नाता

फिर से प्रगतिशील पार्टी (शिवपाल यादव) से जुड़ गए। जिसके बाद उन्हें युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की बड़ी जिम्मेवारी दी गयी। बता दें कि 2019 की लोकसभा के पहले अमित जानी ने सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक विवादित पोस्टर लगाया था। जिसके बाद इनकी गिरफ्तारी का भी आदेश जारी हुआ। हालांकि हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। आठ वर्ष पहले अमित जानी पर एक युवक ने काली स्याही फेंक दी थी, उस वक्त अमित जानी एक प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थें।

आरोपी उस कांफ्रेंस के दौरान बार-बार असुद्दीन ओवैसी जिंदाबाद के नारे लगा रहा था। अमित जानी पर चूड़ियां भी फेंकी और रफ्फु चक्कर हो गया। साल 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव का ऐलान हुआ और एक दल से दुसरे दल में जाने का भी सिलसिला शुरू हुआ। इसी बीच कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने अमित जानी को पार्टी में शामिल कराया। 2016 में JNU में देश विरोधी मामले में छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार जो इस वक्त कांग्रेस के युवा चेहरा माने जाते है अमित जानी ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी।

कई आपाराधिक मामलों में हैं आरोपी

कन्हैया कुमार को धमकी देने के मामले में गिरफ्तार भी किया गया था। अमित जानी पर मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 14 मुकदमे दर्ज हैं। जिसमें लूट, अवैध वसूली, जानलेवा हमला आदि धाराओं में देहरादून, जेपी नगर व मेरठ में सात मुकदमे दर्ज हैं और वह जनपद जेपी नगर से पांच हजार का इनामी भी रह चुके है।

अमित जानी के विरुद्ध दर्ज मुकदमे

  • साल 2011 में धारा 395, 328 व 412 में मुकदमा दर्ज जिला अमरोहा के डिडौली थाने में। गिरफ्तारी न होने पर 12 अप्रैल 2011 को घोषित हुआ पांच हजार का इनाम।
  • गजरौला थाने में वर्ष 2010 में जिला अमरोहा के धारा 395 व 328 का मुकदमा।
  • वर्ष 2010 में मेरठ के लालकुर्ती थाने में धारा 147, 148, 307, 427, 436, 504, 506 एवं 7 क्रिमिनल एक्ट का मुकदमा।
  • वर्ष 2010 में लालकुर्ती में धारा 427 व 436 के तहत मुकदमा।
  • वर्ष 2011 में इंचौली थाने में धारा 307 व 386 में मुकदमा दर्ज।
  • वर्ष 2012 में टीपी नगर थाने में धारा 332, 353, 188 एवं 7 क्रिमिनल एक्ट का मुकदमा।
  • वर्ष 2004 में देहरादून के कलेमन टाउन में धारा 138 एनआइ एक्ट की मुकदमा।

आईपीसी (IPC) का संक्षिप्त विवरण

धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कार्य करने से संबंधित 4 आरोप (आईपीसी धारा -153 ए)

आपराधिक धमकी के लिए सज़ा से संबंधित 3 आरोप (आईपीसी धारा-506)

राष्ट्रीय-एकीकरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछनों, दावों से संबंधित 3 आरोप (आईपीसी धारा-153बी)

डकैती के लिए सज़ा से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-395)

डकैती में चोरी की गई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करने से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-412)

अपराध करने के इरादे से जहर आदि के माध्यम से चोट पहुंचाने से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-328)

हत्या के प्रयास से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-307)

घर आदि को नष्ट करने के इरादे से आग या विस्फोटक पदार्थ द्वारा शरारत से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-436)

लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुंचाने से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-332)

किसी महिला के पति या पति के रिश्तेदार द्वारा उसके साथ क्रूरता करने से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-498ए)

जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों से संबंधित 1 आरोप, जिसका उद्देश्य किसी वर्ग या उसके धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके धार्मिक भावनाओं को अपमानित करना है (आईपीसी धारा -295 ए)

लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमले या आपराधिक बल से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-353)

लोक सेवक द्वारा विधिवत प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-188)

सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने में कई व्यक्तियों द्वारा किए गए कृत्यों से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा -34)

आपराधिक साजिश की सजा से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-120बी)

दंगों के लिए सज़ा से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-147)

घातक हथियार से लैस होकर दंगा करने से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-148)

1 आरोप शरारत से पचास रुपये की क्षति पहुंचाने से संबंधित (आईपीसी धारा-427)

शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने से संबंधित 1 आरोप (आईपीसी धारा-504)

इसे भी पढ़ें- ‘मोदी सरनेम’ मामले में सजा पर रोक लगाए जाने के बाद राहुल गांधी का ट्विट, जानिए क्या कहा?

समदर्शी प्रियम
समदर्शी प्रियमhttps://hindi.khabaribhayiya.com/author/samdarshipriyam/
समदर्शी प्रियम, पत्रकारिता के क्षेत्र मे पांच साल पहले बिहार से मुखिया जी पत्रिका से शुरुआत, नवभारत टाइम्स में स्वतन्त्र ब्लॉग लेखन, डिजिटल प्लेटफॉर्म इंसाइडर लाईव में सब-एडिटर। सतत सीखने की इच्छा बेहतर होने का साधन है।

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